“अपने मां-बाप का सम्मान व आदर अवश्य करें, 57 पदकों में 31 पदक छात्राओं द्वारा प्राप्त किए गए हैं जो महिला सशक्तिकरण का उदाहरण है, उच्च शिक्षा के प्रति नारी शक्ति का रुझान तेजी से बढ़ रहा है तथा 15 प्रायोजित रजत पदकों में से 8 पदक छात्राओं द्वारा प्राप्त किए गए हैं – राज्यपाल आनंदी बेन पटेल”

CSA का 22 वां दीक्षांत समारोह कुलधपति ( राज्यपाल ) के नेतृत्व में हुआ सम्पन्न
कानपुर नगर । चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के ऑडिटोरियम हॉल (कैलाश भवन) में आज कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में 22 वें दीक्षांत समारोह का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मेधावियों को 57 पदक दिए गए।कुल 643 छात्र छात्राओं को उपाधियां प्रदान की गई।उपाधियां और मेडल पाकर छात्र-छात्राएं झूम उठे। पदक पाने के मामले में इस बार छात्रों को पीछे छोड़ते हुए छात्राओं ने बाजी मारी 54.39 फ़ीसदी छात्राएं और 45.61 फ़ीसदी छात्रों को पदक मिले। राज्यपाल और कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल, मुख्य अतिथि नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार, विशिष्ट अतिथि प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान राज्य मंत्री श्री लाखन सिंह राजपूत और विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर डी.आर. सिंह ने मेधावियों को पदक दिए। इस अवसर पर 14 छात्र छात्राओं को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, 14 छात्र छात्राओं को विश्वविद्यालय रजत पदक, 14 छात्र छात्राओं को विश्वविद्यालय कांस्य पदक तथा 15 प्रायोजित स्वर्ण पदक दिए गए। इस दौरान पीएचडी डिग्री धारकों की तस्वीर कुलाधिपति महोदया एवं अतिथियों के साथ ली गई। परास्नातक में सर्वोच्च अंक पाने वाले 17 विद्यार्थियों को पुस्तक पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर एक से अधिक पदक 6 छात्र छात्राओं को मिले। जिसमें शैल्वी वर्मा को तीन पदक, अर्पिता सोनी तीन पदक,प्रियंका सिंह दो पदक, पवन कुमार मौर्य दो पदक, कंचन देवी दो पदक एवं राजशेखर द्विवेदी को दो पदक दिए गए। इस अवसर पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार को कुलाधिपति महोदया द्वारा मानद उपाधि से विभूषित किया गया। राज्यपाल एवं कुलाधिपति महोदय द्वारा इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए जैव संवर्धित गांव अनूपपुर के प्राथमिक विद्यालय के 25 छात्र-छात्राओं को पुस्तकें, दलिया, पेन, फल एवं बैग आदि भेंट किए गए। इस अवसर पर सर्वप्रथम कुलाधिपति एवं अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। सर्व प्रथम कुलपति ने विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या प्रस्तुत की। तथा शिक्षण, शोध एवं प्रसार कार्यों के नवाचारो के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार ने सभी पदक व उपाधि प्राप्त छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं दी उन्होंने गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पाद के लिए प्राकृतिक खेती पर बल दिया। तथा कहा कि मृदा में जीवांश कार्बन बढ़ाने तथा कृषि लागत को कम करने के लिए प्राकृतिक खेती एक विकल्प है।जिससे किसानों की आय दोगुनी हो। विशिष्ट अतिथि कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान श्री लाखन सिंह राजपूत ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 576 कृषि उत्पादन संगठन कार्यरत हैं। जिसे और बढ़ाया जा रहा है जो लघु एवं सीमांत किसानों की आय बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होंगे। इस अवसर पर कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने सभी उपाधि धारकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। तथा कहा कि अपने मां-बाप का सम्मान व आदर अवश्य करें इस अवसर पर उन्होंने कहा कि 57 पदकों में 31 पदक छात्राओं द्वारा प्राप्त किए गए हैं जो महिला सशक्तिकरण का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के प्रति नारी शक्ति का रुझान तेजी से बढ़ रहा है तथा 15 प्रायोजित रजत पदकों में से 8 पदक छात्राओं द्वारा प्राप्त किए गए हैं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज विश्व जल दिवस है अतः सभी लोगों को जल संरक्षण के लिए संकल्प लेना है कि हमें पानी को बर्बाद होने से रोकना है। और भविष्य के लिए जल संरक्षित किया जा सके। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा लिखित पांच पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। जिसमें विश्व विद्यालय वार्षिक प्रतिवेदन, रोजगार परक तकनीकी प्रशिक्षण प्रभाव एवं मूल्यांकन -डॉ अरविंद कुमार सिंह, क्लाइमेट साइंस प्रिंसिपल एंड इट्स एप्लीकेशन ऑन एग्रीकल्चर- डॉक्टर नौशाद खान एवं डॉ दिग्विजय दुबे,पादप पोषण में जैव उर्वरकों का महत्व -डॉक्टर खलील खान,डॉ मनोज मिश्रा, डॉक्टर एच जी प्रकाश एवं डॉक्टर डीआर सिंह तथा बीज उत्पादन तकनीक -डॉक्टर एस पी सचान, डॉ मनोज मिश्र ,डॉ खलील खान, डॉक्टर एच ज़ी प्रकाश एवं डॉक्टर डीआर सिंह द्वारा लिखित पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर नौशाद खान एवं डॉ श्वेता यादव ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ सर्वेंद्र कुमार, सभी अधिष्ठाता गण, निदेशक गण, विभागाध्यक्ष एवं सभी संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

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