महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री बने एकनाथ शिंदे वह फडणवीस बने डिप्टी सीएम, आओ जाने शिंदे का इतिहास


महाराष्ट्र में सियासी संकट के बीच बुधवार देर रात उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा देेने के बाद एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री और देवेंद्र फडणवीस ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली दोनों को राज्यपाल महोदय ने शपथ दिलाई ।

बीजेपी के पूर्ण समर्थन के बाद एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के २०वें मुख्यमंत्री के रूप में बाला साहेब ठाकरे को याद कर सपथ ली और शिवसेना के असली कार्यकर्ता बताया, शिवसेना से पहले आरएसएस में शाखा प्रमुख भी रह चुके हैं ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया देवेंद्र फड़नीस को महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम के रूप में शपथ लेने पर बधाई वह हर भाजपा कार्यकर्ता के लिए प्रेरणा है उनका अनुभव और विशेषता सरकार के लिए एक संपत्ति होगी मुझे विश्वास है कि वह महाराष्ट्र के विकास पथ को और मजबूत करेंगे वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर बधाई दी ।
राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के समर्थकों ने नासिक में मनाया जोरदार जश्न वही शिंदे गुट के विधायकों ने एकनाथ शिंदे का नाम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में घोषित किए जाने के बाद गोवा के एक होटल में ठहरे शिंदे गुट के विधायकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया ।
आपको बता दें कि कभी ऑटो चलाते थे शिंदे दो बच्चों को खोने के बाद राजनीति छोड़ दी थी पढ़ाई के लिए शिंदे थाने आए 11वीं तक की पढ़ाई यहीं पर रुक कर कि इसके बाद वागले एस्टेट इलाके में रहकर ऑटो रिक्शा चलाने लगे इसी दौरान उनकी मुलाकात शिवसेना नेता आनंद दिघे से हुई महज 18 साल की उम्र में उनका राजनीतिक जीवन शुरू हुआ एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं महाराष्ट्र में आए सियासी तूफान का केंद्र रहे एकनाथ शिंदे शिवसेना के इतिहास में सबसे बड़ी बगावत का चेहरा बन चुके हैं

आखिर कौन है एकनाथ शिंदे जिन्होंने शिवसेना में ठाकरे परिवार को चुनौती दी आइए जानते हैं इसके विषय में विस्तार से एकनाथ शिंदे का जन्म 9 फरवरी 1964 को हुआ था सतारा उनके गृह जनपद का नाम है पढ़ाई के लिए शिंदे थाने आए 11वीं तक की पढ़ाई की इसके बाद वागले स्टेट इलाके में रहकर ऑटो रिक्शा चलाने लगे इसी दौरान उनकी मुलाकात शिवसेना के नेता आनंद के से हुई महज 18 साल की उम्र में उनका राजनीतिक जीवन शुरू हुआ और शिंदे एक आम शिवसेना कार्यकर्ता के रूप में काम करने लगे करीब डेढ़ दशक तक शिवसेना कार्यकर्ता के रूप में काम करने के बाद 1997 में शिंदे ने चुनावी राजनीति में कदम रखा 1997 में अखाड़ा नगर निगम चुनाव में आनंद डीजे ने शिंदे को पार्षद का टिकट दिया शिंदे अपने पहले ही चुनाव में जीतने में सफल रहे 2001 में नगर निगम सदन में विपक्ष के नेता बने इसके बाद दोबारा साल 2002 में दूसरी बार निगम पार्षद बने आनंद दिघे के निधन के बाद शिंदे का कद साल 2001 के बाद बढ़ना शुरू हुआ जब उनके राजनीतिक गुरु आनंद जी का निधन हो गया उसके बाद थाने की राजनीति में शिंदे का पकड़ मजबूत होने लगी 2005 में नारायण राणे के पार्टी छोड़ने के बाद संडे का कद शिवसेना में बढ़ता ही चला गया जब राज ठाकरे ने पार्टी छोड़ी तो शिंदे ठाकरे परिवार की करीब आ गए 2004 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना ने शिंदे को ठाड़े विधानसभा सीट से टिकट दिया यहां भी शिंदे को जीत मिली उन्होंने कांग्रेस के मनोज शिंदे को 37 हजार से अधिक वोट से मात दी इसके बाद 2009, 2014, 2019 में शिंदे ठाणे जिले की ऊपरी छपरा खड़ी सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे देवेंद्र फडणवीस सरकार में शिंदे राज्य के लोक निर्माण मंत्री रहे 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद से मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे थे चुनाव के बाद विधायक दल की बैठक में आदित्य ठाकरे ने शिंदे के नाम का प्रस्ताव रखा और वह शिवसेना विधायक दल के नेता चुने गए इसके बाद तो उनके समर्थकों ने थाने में भावी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पोस्टर तक लगा दिए थे हालांकि और एनसीपी के दबाव में उद्धव ठाकरे का नाम आगे आया इसके बाद शिंदे बैकफुट पर आ गए सरकार में सिंदे राज्य के शहरी विकास मंत्री होने के साथ ठाणे जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं कहा जाता है कि शिंदे कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन से खुश नहीं थे इसके बाद उनके और उद्धव ठाकरे के बीच दूरियां बढ़ने लगी फरवरी 2022 में एकनाथ शिंदे ने जन्मदिन पर ही उनके समर्थकों ने भावी मुख्यमंत्री का पोस्टर लगाए थे बात उस वक्त की है आज उनका सपना भी साकार हो गया और बगावत करने के बाद आज भाजपा के साथ मिलकर मुख्यमंत्री के पद की शपथ ले चुके हैंं।

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