दिल्ली में फ़ैल रहा का संक्रमण, एक दिन में सामने आये 63 नए केस

December 29, 2021 by No Comments

जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, वैसे-वैसे कोरोना की तीसरी लहर का खतरा बढ़ता जा रहा है. ओमिक्रॉन (Omicron) ने अब रफ्तार पकड़ ली है. दिल्ली में एक दिन में सबसे ज्यादा 63 ओमिक्रॉन केस मिले हैं, जो किसी भी राज्य में एक दिन में मिले ओमिक्रॉन मरीजों की सबसे बड़ी संख्या है. इसके बाद दिल्ली में ओमिक्रॉन केस की कुल संख्या 165 हो गई है. ओमिक्रॉन केस की सबसे ज्यादा संख्या महाराष्ट्र में है. जहां कुल केस बढ़कर 167 हो चुके हैं, जबकि 73 मामलों के साथ गुजरात तीसरे नंबर पर है. केरल में 57 केस मिल चुके हैं. देश में ओमिक्रॉन के मरीजों की संख्या बढ़कर 653 हो गई है. सोमवार को एक दिन में सबसे ज्यादा ओमिक्रॉन के 135 केस मिले हैं. सोमवार को ही गोवा और मणिपुर में ओमिक्रॉन की एंट्री के बाद अब ये वैरिएंट 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैल गया है.

दिसंबर को मिला था ओमिक्रॉन का पहला केस

हालांकि अच्छी बात ये है कि अब तक 186 मरीज ठीक भी हो चुके हैं, लेकिन चिंता की बात यह है कि देश में हर चार दिन में ओमिक्रॉन केसों की संख्या दोगुनी हो रही है. दो दिसंबर को ओमिक्रॉन का पहला केस मिला था. 100 केस होने में 15 दिन लगे थे, लेकिन 100 से 200 केस होने में सिर्फ चार दिन लगे, फिर 200 से 400 केस होने में भी चार दिन लगे. 25 दिसंबर को ओमिक्रॉन केसों ने 400 का आंकड़ा छुआ, जो 27 दिसंबर यानी दो दिन बाद 600 से ज्यादा हो गए. दिल्ली में आज कोरोना के 496 नए मामले सामने आए हैं, जो 4 जून के बाद सबसे बड़ी संख्या है. कोरोना के इस बढ़ते हुए खतरे को देखते हुए आज केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP का येलो अलर्ट घोषित कर दिया है, लेकिन क्या दिल्लीवाले इसके लिए तैयार हैं?…आजतक ने इसका रियलिटी चेक किया है. एक तो ओमिक्रॉन खतरा, ऊपर से ये भीड़-भड़क्का. सिर्फ नाइट कर्फ्यू से बात बनती नहीं दिखी, तो दिल्ली सरकार को येलो अलर्ट घोषित करना ही था.

इसलिए लागू किया गया है लेवल वन

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमने ग्रेडेड प्लान बनाया था. हमने लिखा था कि 0.5 से ज्यादा पॉजिटिविटी रेट होगा, तो ऐसे हालात में येलो लेवल आ जाएगा. और उसमें कोरोना से बचाव के लिए ये चीजें या पाबंदियां की जाएंगी. प्वाइंट 5 से ज्यादा चल रहा है. इसलिए लेवल 1 लागू करने का निर्णय लिया गया है. सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स बंद हैं. बैंक्वेट हॉल और ऑडिटोरियम बंद हैं. स्टेडियम और स्विमिंग पूल बंद हैं. स्कूल, कॉलेज, कोचिंग इंस्टीट्यूट बंद हैं. कोरोना से डरना भूल चुके दिल्ली वालों के लिए, ये अलर्ट का पहला लेवल है.

दिल्ली में एक्टिवेट हो चुका है GRAP का लेवल 1

दिल्ली में सिर्फ ओमिक्रॉन केस ही नहीं, बल्कि कोरोना के केस भी बढ़ने शुरू हो चुके हैं. जून के बाद लगातार मामले घटते जा रहे थे, लेकिन पिछले पंद्रह दिन से हर दिन मामले बढ़ रहे थे. पिछले चार-पांच दिनों से तो कोरोना का पॉजिटिविटी रेट 0.5 फीसदी से ज्यादा हो चुका है. इसलिए अब दिल्ली में GRAP का लेवल 1 एक्टिवेट हो चुका है.

होटल के अंदर बैंक्वेट और कॉन्फ्रेंस हॉल बंद रहेंगे

गैर जरूरी सामानों वाली सेवाओं या सामान वाली दुकानें और मॉल ऑड इवन नियम के तहत सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक खुलेंगे. होटल खुले रहेंगे, लेकिन होटल के अंदर मौजूद बैंक्वेट और कॉन्फ्रेंस हॉल बंद रहेंगे. सैलून और ब्यूटी पॉर्लर खुले रहेंगे. रेस्टोरेंट और बार 50 फीसदी क्षमता के साथ खुलेंगे. दिल्ली मेट्रो और बसें बैठने की 50 फीसदी क्षमता के साथ चलेंगी और खड़े होकर यात्रा करने की अनुमति नहीं रहेगी. शादी समारोह और अंतिम संस्कार में सिर्फ 20 लोगों को शामिल होने की अनुमति मिलेगी. धार्मिक स्थल खुले रहेंगे, लेकिन श्रद्धालुओं की एंट्री प्रतिबंधित रहेगी. प्राइवेट दफ़्तर 50 फीसदी क्षमता के साथ सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खोलने की अनुमति रहेगी.

दिल्ली में तत्काल प्रभाव से लागू हो चुकी हैं येलो अलर्ट की पाबंदियां

दिल्ली में येलो अलर्ट की ये सारी पाबंदियां तत्काल प्रभाव से लागू हो चुकी हैं. दिल्लीवालों को दोबारा से ये पाबंदियां इसलिए झेलनी पड़ रही हैं, क्योंकि लोगों ने कोरोना के डर को अपने दिलों से पूरी तरह से निकाल दिया था. दिल्ली के बाजारों में उमड़ती भीड़ की तस्वीरें देखकर दिल्ली हाईकोर्ट तक को ऑर्डर देना पड़ गया. ये सारी कवायद इसलिए हो रही है, ताकि दोबारा से बाजारों को फिर से पूरी तरह बंद करने की नौबत न आए. केजरीवाल ने कहा कि अब ये तस्वीरें नहीं आनी चाहिए कि मार्केट में भारी भीड़ आ रही है, फिर हमें मार्केट बंद करने पड़ेंगे. ये तो अच्छी चीज नहीं है. लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित होती है.

अलर्ट के चार लेवल किए गए हैं तय

दिल्ली सरकार ने जो पाबंदियां लगाई हैं, वो GRAP यानी Graded Response Action Plan का हिस्सा हैं, जिसे Delhi Disaster Management Authority ने कोरोना की दूसरी लहर के बाद तैयार किया था. GRAD का मकसद कोरोना की स्थिति के आधार पर पाबंदियां लगाने और हटाने की एक स्पष्ट और वैज्ञानिक व्यवस्था बनाना था, जिसमें अलर्ट के चार लेवल तय किए गए हैं. उन्हें एक्टिवेट करने की स्थितियां तय की गई हैं.येलो अलर्ट का ये पहला लेवल है. ये तभी लगता है जब दो दिनों तक कोरोना पॉजिटिविटी रेट 0.5 प्रतिशत रहे या फिर सात दिनों की अवधि में औसतन 1500 से ज्यादा केस आएं. या अगर सात दिनों तक औसतन 500 ऑक्सीजन बेड भरे रहें, तो ये अलर्ट घोषित किया जाता है.

कब लागू होता है दूसरा लेवल

दूसरा लेवल एंबर अलर्ट है. एंबर का अर्थ है गहरा पीला. यानी जब बात येलो अलर्ट से थोड़ी ज़्यादा गंभीर हो जाती है. अलर्ट का ये दूसरा लेवल तब लागू होता है, जब दो दिन तक पॉजिटिविटी रेट 1 प्रतिशत से ज्यादा हो या सात दिनों में 3500 मामले आते रहें या फिर सात दिनों तक 700 ऑक्सीजन बेड भरे रहें.

इन परिस्थितियों में लागू होगा तीसरा लेवल

तीसरा लेवल ऑरेंज अलर्ट है. ये अलर्ट तब लागू होता है, जब लगातार दो दिन तक पॉजिटिविटी रेट 2 प्रतिशत रहे या सात दिन की अवधि में 9000 से ज्यादा मामले आएं या फिर अस्पतालों में एक हजार से ज्यादा मरीज रोज भर्ती होने लगें.रेड अलर्ट तब लागू होता है जब लगातार दो दिनों तक पॉजिटिविटी रेट 5 प्रतिशत या उससे ज्यादा हो या फिर सात दिनों में औसत 16000 से ज्यादा मामले आएं या अस्पतालों में औसतन 3000 बेड भरे रहें.

इसलिए दिल्ली में लागू किया गया है येलो अलर्ट

दिल्ली का पॉजिटिविटी रेट इस वक्त 0.67 प्रतिशत हो चुका है. जिसकी वजह से येलो अलर्ट जारी किया गया है, लेकिन दिल्ली के दक्षिणी जिले में पॉजिटिविटी रेट 1 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है, जो एक हफ्ते पहले महज 0.41 प्रतिशत थी. यानी दिल्ली में कोरोना के केस अब ज्यादा आने लगे हैं. अगर ये ट्रेंड जारी रहा, तो वो दिन दूर नहीं जब दिल्ली में रेड अलर्ट लागू करने की नौबत आ जाए.

रैलियां करने वाले नेता कैसे देंगे लोगों को हिदायत

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में कोरोना का येलो अलर्ट तो जारी कर दिया, लेकिन रैलियां करने वाले नेता किस हक से लोगों को कोरोना नियमों का पालन करने की हिदायत दे सकते हैं? क्या कोरोना ने राजनीतिक दलों से चुनावी राज्यों में न फैलने का वादा किया है? अगर ऐसा नहीं है तो फिर सारे नियम-कायदों का पाठ सिर्फ आम जनता को ही क्यों पढ़ाया जा रहा है.

रैलियों में नजरअंदाज की जा रही है भीड़

चुनावी रैलियों में लाखों लोगों की भीड़ को नजरअंदाज किया जा रहा है. अगर रैलियों की वजह से चुनावी राज्यों में कोरोना की Tally बढ़ी तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? वो भी तब जब कोरोना की तीसरी लहर और चुनाव एक ही वक्त पर आने वाले हैं. ये सवाल चुनाव आयोग के सामने खड़ा है, जिसका जवाब तलाशने के लिए चुनाव आयोग की टीम उत्तर प्रदेश पहुंच चुकी है.

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